Tuesday, December 26, 2017

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तेरे हर ख़्वाब में मेरा भी बसेरा करना
यहाँ मुमकिन नहीं हर शब को सवेरा करना

कितना मुश्किल है उस शख़्स को मेरा करना
कितना मुश्किल है उस शख़्स को तेरा करना

मुझको एक उम्र लगी जुगनुओं को लाने में
तुमको आसान था इस घर में अँधेरा करना

इन परिंदों को भला किसने बताया होगा
कहाँ उड़ना और किस शाख़ पे डेरा करना

बादलों हो अगर तो जंग ए आफ़ताब करो
तुमसे होता है सिर्फ़ चाँद का घेरा करना

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