Monday, June 3, 2013

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तख़्त वाजिब है गुलाम बदल जायेंगे ,
कुछ हाकिमो के अब काम बदल जायेंगे 
देख लीजिये मोहब्बत को जी भर के ,
रात गुज़रेगी तो फिर नाम बदल जायेंगे।

क्या भरम पालिए शोहरत का अब -
महफ़िल वही है बस जाम बदल जायेंगे 
मत भूलिए शुक्रिया अता करना ,
वक़्त के साथ एहसान बदल जायेंगे .

सुना है फ़ौज है सरहद पे खड़ी 
कुछ गिद्धों के शमशान बदल जायेंगे -
जंग क्या है बस एक नज़र है साहब ,
ऐनक बदलते ही अंजाम बदल जायेंगे -

3 comments:

  1. सुना है फ़ौज है सरहद पे खड़ी
    कुछ गिद्धों के शमशान बदल जायेंगे -
    जंग क्या है बस एक नज़र है साहब ,
    ऐनक बदलते ही अंजाम बदल जायेंगे -

    जबरदस्त .. हर मुक्तक लाजवाब ... वाह वाह निकल जाता है मुंह से अपने आप ही ...

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  2. ख़याल और बयानगी दोनों उम्दा .

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  3. अच्छा लिखते हो भाई ..
    अब यह कलम चलती रहे !!
    बधाई !!

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