Monday, November 13, 2017

24

ये उसकी दूर होने की सफ़ाई है 
थोड़ी मजबूरी थोड़ी बेवफ़ाई है 
कल तलक जान थी वो मेरी
आज मेरी  जान पे बन आइ है 

हुस्न वाले धोखा देंगे अक्सर 
बुज़ुर्गों की सलाह में सच्चाई है
बहुत दिनो बाद हूँ घर लौटा
कुछ किताबों से धूल हटाई है 

मेरा लुटना तेरे शहर में आकर
मेरे इश्क़ की कमाई है 
चुपचाप मेरे कान में सच कह जा
एसी भी क्या रूसवाई है

क्या ख़्वाब ए मोहब्बत मेरा था
क्या हक़ीक़त तूने दिखाई है
हम कभी एक हो नहीं सकते
बात देर से समझ आइ है

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